ग़ज़ल

आरस सोँ आरत सँभारत न सीस पट

पद्माकर · सब कलाम देखें
आरस सोँ आरत सँभारत न सीस पट ,गजब गुजारत गरीबन की धार पर ।कहैं पदमाकर सुरा सोँ सरसार तैसे ,बिथुरि बिराजैं बार हीरन के हार पर ।छहरि छहरि छिति छाजत छरा के छोर,भोर उठि आई केलि मन्दिर दुवार पर।एक पग भीतर औ एक देहरी पै धरै ,एक कर कंज एक कर है किवार पर
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