ग़ज़ल

जगद्विनोद

पद्माकर · सब कलाम देखें
फूलन के खंभा पाट-पटरी सुफूलन की,फूलन के फँदना फँदे हैं लाल डोरे में ।कहै 'पद्माकर' बितान तने फूलन केफूलन की झालरें त्यों झूलतीं झकोरे में ।फूल रही फूलन सुफूल फुलवारी तहाँ,फूलई के फरस फबे हैं कुंज कोरे में ।फूलभरी फूलजरी फूलझरी फूलन में, ।फूलई सी झूलत सुफूल के हिंडोरे में ।।
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