ग़ज़ल

चाह भरो चंचल हमारो चित्त नौल बधू

पद्माकर · सब कलाम देखें
चाह भरो चंचल हमारो चित्त नौल बधू ,तेरी चाल चँचल चितौनि मे बसत है ।कहै पदमाकर सुचँचल चितौनिहु ते ,औझकि उझकि झझकनि मे फसत है ।औझकि उझकि झझकनि ते सुरझि वेस ,बाहीँ की गहनि माँहि आइ बिलसत है ,बाहीँ की गहनि ते सुनाही की कहनि आयो ,नाहीँ की कहनि ते सुनाहीं निकसत है ।
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