ग़ज़ल

ऐ ब्रजचन्द गोविंद गोपाल

पद्माकर · सब कलाम देखें
ऐ ब्रजचन्द गोविंद गोपाल ! सुन्यो क्यों न एते कमाल किए मैं .त्यों पद्माकर आनंद के नद हौ, नन्द नंदन ! जानि लिए मैं .माखन चोरी कै खोरिन ह्वै चले भाजि कछु मानि जिए मैं .दुरि न दौरि दुरयो जौ चहौ तौ दुरौ किन मेरे अँधेरे हिए मैं .
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