ग़ज़ल
आजु दिन कान्ह आगमन के बधाए सुनि
आजु दिन कान्ह आगमन के बधाए सुनि ,छाए मग फूलन सुहाए थल थल के ।कहैँ पदमाकर त्योँ आरती उतारिबे को ,थारन मे दीप हीरा हारन के छलके ।कंचन के कलस भराए भूरि पन्नन के ,ताने तुँग तोरन तहाँई झलाझल के ।पौर के दुवारे तैँ लगाय केलि मँदिर लौ,पदमिनि पांवडे पसारे मखमल के ।
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