ग़ज़ल
आली हौँ गई ही आज भूलि बरसाने कहूँ
आली हौँ गई ही आज भूलि बरसाने कहूँ ,तापै तू परै है पदमाकर तनैनी क्योँ ।व्रज वनिता वै वनितान पै रचैहैँ फाग ,तिनमे जो उधमिनि राधा मृगनैनी योँ ।छोरि डारी केसर सुबेसर बिलोरि डारी ,बोरि डारी चूनरि चुचात रँग रैनी ज्योँ ।मोहि झकझोरि डारी कचुँकी मरोरि डारी ,तोरि डारी कसनि बिथोरि डारी बैनी त्योँ ।
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