ग़ज़ल
लै पटपीत भले पहिरे पहिराय पियै चुनि चूनरि खासी
लै पटपीत भले पहिरे पहिराय पियै चुनि चूनरि खासी ।त्योँ पदमाकर साँझहिते सिगरी निसि केलि कला परगासी।फूलत फूल गुलाबन के चटकाहट चौँक चली चपला - सी ।कान्ह के कानन आँगुरी नाइ, रही लपटाइ लवंग लता- सी ।
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