ग़ज़ल

आई खेलि होरी, कहूँ नवल किसोरी भोरी

पद्माकर · सब कलाम देखें
आई खेलि होरी, कहूँ नवल किसोरी भोरी,बोरी गई रंगन सुगंधन झकोरै है ।कहि पदमाकर इकंत चलि चौकि चढ़ि,हारन के बारन के बंद-फंद छोरै है ॥घाघरे की घूमनि, उरुन की दुबीचै पारि,आँगी हू उतारि, सुकुमार मुख मोरै है ।दंतन अधर दाबि, दूनरि भई सी चाप,चौवर-पचौवर कै चूनरि निचौरै है ॥
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