ग़ज़ल

एकै सँग हाल नँदलाल औ गुलाल दोऊ

पद्माकर · सब कलाम देखें
एकै सँग हाल नँदलाल औ गुलाल दोऊ,दृगन गये ते भरी आनँद मढै नहीँ ।धोय धोय हारी पदमाकर तिहारी सौँह,अब तो उपाय एकौ चित्त मे चढै नहीँ ।कैसी करूँ कहाँ जाऊँ कासे कहौँ कौन सुनै,कोऊ तो निकारो जासोँ दरद बढै नहीँ ।एरी! मेरी बीर जैसे तैसे इन आँखिन सोँ,कढिगो अबीर पै अहीर को कढै नहीँ ।
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh