ग़ज़ल
प्रियतम
एक दिन विष्णुजी के पास गए नारद जी,पूछा, "मृत्युलोक में कौन है पुण्यश्यलोकभक्त तुम्हारा प्रधान?"
विष्णु जी ने कहा, "एक सज्जन किसान हैप्राणों से भी प्रियतम।""उसकी परीक्षा लूँगा", हँसे विष्णु सुनकर यह,कहा कि, "ले सकते हो।"
नारद जी चल दिएपहुँचे भक्त के यहॉंदेखा, हल जोतकर आया वह दोपहर को,दरवाज़े पहुँचकर रामजी का नाम लिया,स्नान-भोजन करकेफिर चला गया काम पर।शाम को आया दरवाज़े फिर नाम लिया,प्रात: काल चलते समयएक बार फिर उसनेमधुर नाम स्मरण किया।
"बस केवल तीन बार?"नारद चकरा गए-किन्तु भगवान को किसान ही यह याद आया?गए विष्णुलोकबोले भगवान से"देखा किसान कोदिन भर में तीन बारनाम उसने लिया है।"
बोले विष्णु, "नारद जी,आवश्यक दूसराएक काम आया हैतुम्हें छोड़कर कोईऔर नहीं कर सकता।साधारण विषय यह।बाद को विवाद होगा,तब तक यह आवश्यक कार्य पूरा कीजिएतैल-पूर्ण पात्र यहलेकर प्रदक्षिणा कर आइए भूमंडल कीध्यान रहे सविशेषएक बूँद भी इससेतेल न गिरने पाए।"
लेकर चले नारद जीआज्ञा पर धृत-लक्ष्यएक बूँद तेल उस पात्र से गिरे नहीं।योगीराज जल्द हीविश्व-पर्यटन करकेलौटे बैकुंठ कोतेल एक बूँद भी उस पात्र से गिरा नहींउल्लास मन में भरा थायह सोचकर तेल का रहस्य एकअवगत होगा नया।नारद को देखकर विष्णु भगवान नेबैठाया स्नेह सेकहा, "यह उत्तर तुम्हारा यही आ गयाबतलाओ, पात्र लेकर जाते समय कितनी बारनाम इष्ट का लिया?"
"एक बार भी नहीं।"शंकित हृदय से कहा नारद ने विष्णु से"काम तुम्हारा ही थाध्यान उसी से लगा रहानाम फिर क्या लेता और?"विष्णु ने कहा, "नारदउस किसान का भी काममेरा दिया हुया है।उत्तरदायित्व कई लादे हैं एक साथसबको निभाता औरकाम करता हुआनाम भी वह लेता हैइसी से है प्रियतम।"नारद लज्जित हुएकहा, "यह सत्य है।"
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.