ग़ज़ल
आज प्रथम गाई पिक
आज प्रथम गाई पिक पञ्चम।गूंजा है मरु विपिन मनोरम।
मरुत-प्रवाह, कुसुम-तरु फूले,बौर-बौर पर भौरे झूले,पात-पात के प्रमुदित झूले,छाय सुरभि चतुर्दिक उत्तम।
आंखों से बरसे ज्योति-कण,परसे उन्मन - उन्मन उपवन,खुला धरा का पराकृष्ट तनफूटा ज्ञान गीतमय सत्तम।
प्रथम वर्ष की पांख खुली है,शाख-शाख किसलयों तुली है,एक और माधुरी चुली है,गीतम-गन्ध-रस-वर्णों अनुपम।
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