ग़ज़ल

मार दी तुझे पिचकारी

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' · सब कलाम देखें
मार दी तुझे पिचकारी,कौन री, रँगी छबि यारी ?
फूल -सी देह,-द्युति सारी,हल्की तूल-सी सँवारी,रेणुओं-मली सुकुमारी,कौन री, रँगी छबि वारी ?
मुसका दी, आभा ला दी,उर-उर में गूँज उठा दी,फिर रही लाज की मारी,मौन री रँगी छबि प्यारी।
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