ग़ज़ल

उत्साह

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' · सब कलाम देखें
:::(गीत)::बादल, गरजो!--घेर घेर घोर गगन, धाराधर जो!:ललित ललित, काले घुँघराले,:बाल कल्पना के-से पाले,विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले!:वज्र छिपा, नूतन कविता::::फिर भर दो:--::::बादल, गरजो!विकल विकल, उन्मन थे उन्मन,विश्व के निदाघ के सकल जन,आये अज्ञात दिशा से अनन्त के घन!:तप्त धरा, जल से फिर::::शीतल कर दो:--::::बादल, गरजो!
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