ग़ज़ल
गीत गाने दो मुझे
गीत गाने दो मुझे तो,वेदना को रोकने को।
चोट खाकर राह चलतेहोश के भी होश छूटे,हाथ जो पाथेय थे, ठग-ठाकुरों ने रात लूटे,कंठ रूकता जा रहा है,आ रहा है काल देखो।
भर गया है ज़हर सेसंसार जैसे हार खाकर,देखते हैं लोग लोगों को,
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