ग़ज़ल मातृ वंदना सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन नर जीवन के स्वार्थ सकलबलि हों तेरे चरणों पर, माँमेरे श्रम सिंचित सब फल।जीवन के रथ पर चढ़कर स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.