ग़ज़ल

आज प्रथम गाई पिक पंचम

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' · सब कलाम देखें
आज प्रथम गाई पिक पंचम।गूंजा है मरु विपिन मनोरम।
मस्त प्रवाह, कुसुम तरु फूले,बौर-बौर पर भौंरे झूले,पात-गात के प्रमुदित झूले,छाई सुरभि चतुर्दिक उत्तम।
आँखों से बरसे ज्योतिःकण,परसे उन्मन-उन्मन उपवन,खुला धरा का पराकृष्ट तन,फूटा ज्ञान गीतमय सत्तम।
प्रथम वर्ष की पांख खुली है,शाख-शाख किसलयों तुली है,एक और माधुरी घुली है,गीत-गन्ध-रस वर्णों अनुपम।
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