ग़ज़ल

जान भर रहे हैं जंगल में

नागार्जुन · सब कलाम देखें
गीली भादोंरैन अमावस
कैसे ये नीलम उजास केअच्छत छींट रहे जंगल मेंकितना अद्भुत योगदान हैइनका भी वर्षा–मंगल मेंलगता है ये ही जीतेंगेशक्ति प्रदर्शन के दंगल मेंलाख–लाख हैं, सौ हजार हैंकौन गिनेगा, बेशुमार हैंमिल–जुलकर दिप–दिप करते हैंकौन कहेगा, जल मरते हैं...जान भर रहे हैं जंगल में
जुगनू है ये स्वयं प्रकाशीपल–पल भास्वर पल–पल नाशीकैसा अद्भुत योगदान हैइनका भी वर्षा मंगल मेंइनकी विजय सुनिश्चित ही हैतिमिर तीर्थ वाले दंगल मेंइन्हें न तुम 'बेचारे' कहनाअजी यही तो ज्योति–कीट हैंजान भर रहे हैं जंगल में
गीली भादोंरैन अमावस
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