ग़ज़ल

चंदू, मैंने सपना देखा

नागार्जुन · सब कलाम देखें
चंदू, मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटाचंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटाचंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबूचंदू,मैंने सपना देखा, खेल-कूद में हो बेकाबू
मैंने सपना देखा देखा, कल परसों ही छूट रहे होचंदू, मैंने सपना देखा, खूब पतंगें लूट रहे होचंदू, मैंने सपना देखा, लाए हो तुम नया कैलंडरचंदू, मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर मैं हूँ अंदरचंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से पटना आए होचंदू, मैंने सपना देखा, मेरे लिए शहद लाए हो
चंदू मैंने सपना देखा, फैल गया है सुयश तुम्हाराचंदू मैंने सपना देखा, तुम्हें जानता भारत साराचंदू मैंने सपना देखा, तुम तो बहुत बड़े डाक्टर होचंदू मैंने सपना देखा, अपनी ड्यूटी में तत्पर हो
चंदू, मैंने सपना देखा, इम्तिहान में बैठे हो तुमचंदू, मैंने सपना देखा, पुलिस-यान में बैठे हो तुमचंदू, मैंने सपना देखा, तुम हो बाहर, मैं हूँ अंदरचंदू, मैंने सपना देखा, लाए हो तुम नया कैलेंडर
(1976)
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