ग़ज़ल
प्रतिबद्ध हूँ, संबद्ध हूँ, आबद्ध हूँ
प्रतिबद्ध हूँसंबद्ध हूँआबद्ध हूँ
प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, प्रतिबद्ध हूँ –बहुजन समाज की अनुपल प्रगति के निमित्त –संकुचित ‘स्व’ की आपाधापी के निषेधार्थ...अविवेकी भीड़ की ‘भेड़या-धसान’ के खिलाफ़…अंध-बधिर ‘व्यक्तियों’ को सही राह बतलाने के लिए...अपने आप को भी ‘व्यामोह’ से बारंबार उबारने की खातिर...प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, शतधा प्रतिबद्ध हूँ!
संबद्ध हूँ, जी हाँ, संबद्ध हूँ –सचर-अचर सृष्टि से…शीत से, ताप से, धूप से, ओस से, हिमपात से…राग से, द्वेष से, क्रोध से, घृणा से, हर्ष से, शोक से, उमंग से, आक्रोश से...निश्चय-अनिश्चय से, संशय-भ्रम से, क्रम से, व्यतिक्रम से…निष्ठा-अनिष्ठा से, आस्था-अनास्था से, संकल्प-विकल्प से…
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