ग़ज़ल

आओ रानी

नागार्जुन · सब कलाम देखें
आओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी,यही हुई है राय जवाहरलाल कीरफ़ू करेंगे फटे-पुराने जाल कीयही हुई है राय जवाहरलाल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!
आओ शाही बैण्ड बजायें,आओ बन्दनवार सजायें,खुशियों में डूबे उतरायें,आओ तुमको सैर करायेंउटकमंड की, शिमला-नैनीताल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!
तुम मुस्कान लुटाती आओ,तुम वरदान लुटाती जाओ,आओ जी चाँदी के पथ पर,आओ जी कंचन के रथ पर,नज़र बिछी है, एक-एक दिक्पाल कीछ्टा दिखाओ गति की लय की ताल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी !
सैनिक तुम्हें सलामी देंगेलोग-बाग बलि-बलि जायेंगेदॄग-दॄग में खुशियां छ्लकेंगीओसों में दूबें झलकेंगीप्रणति मिलेगी नये राष्ट्र के भाल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!
बेबस-बेसुध, सूखे-रुखडे़,हम ठहरे तिनकों के टुकडे़,टहनी हो तुम भारी-भरकम डाल कीखोज खबर तो लो अपने भक्तों के खास महाल की!लो कपूर की लपटआरती लो सोने की थाल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!
भूखी भारत-माता के सूखे हाथों को चूम लोप्रेसिडेन्ट की लंच-डिनर में स्वाद बदल लो, झूम लोपद्म-भूषणों, भारत-रत्नों से उनके उद्गार लोपार्लमेण्ट के प्रतिनिधियों से आदर लो, सत्कार लोमिनिस्टरों से शेकहैण्ड लो, जनता से जयकार लोदायें-बायें खडे हज़ारी आफ़िसरों से प्यार लोधनकुबेर उत्सुक दिखेंगे, उनको ज़रा दुलार लोहोंठों को कम्पित कर लो, रह-रह के कनखी मार लोबिजली की यह दीपमालिका फिर-फिर इसे निहार लो
यह तो नयी-नयी दिल्ली है, दिल में इसे उतार लोएक बात कह दूँ मलका, थोडी-सी लाज उधार लोबापू को मत छेडो, अपने पुरखों से उपहार लोजय ब्रिटेन की जय हो इस कलिकाल की!आओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!रफ़ू करेंगे फटे-पुराने जाल कीयही हुई है राय जवाहरलाल कीआओ रानी, हम ढोयेंगे पालकी!
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