ग़ज़ल

फूले कदंब

नागार्जुन · सब कलाम देखें
फूले कदंबटहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदंबफूले कदंबसावन बीताबादल का कोप नहीं रीताजाने कब से वो बरस रहाललचाई आंखों से नाहकजाने कब से तू तरस रहामन कहता है छू ले कदंबफूले कदंबझूले कदंब
''१९६४ में लिखी गई''
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