ग़ज़ल

नाहक ही डर गई, हुज़ूर

नागार्जुन · सब कलाम देखें
भुक्खड़ के हाथों में यह बन्दूक कहाँ से आईएस० डी० ओ० की गुड़िया बीबी सपने में घिघियाई
बच्चे जागे, नौकर जागा, आया आई पाससाहेब थे बाहर, घर में बीमार पड़ी थी सास
नौकर ने समझाया, नाहक ही दर गई हुज़ूर !वह अकाल वाला थाना, पड़ता है काफ़ी दूर !
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