ग़ज़ल
अपने खेत में
अपने खेत में....
जनवरी का प्रथम सप्ताहखुशग़वार दुपहरी धूप में...इत्मीनान से बैठा हूँ.....
अपने खेत में हल चला रहा हूँइन दिनों बुआई चल रही हैइर्द-गिर्द की घटनाएँ हीमेरे लिए बीज जुटाती हैंहाँ, बीज में घुन लगा हो तोअंकुर कैसे निकलेंगे !
जाहिर हैबाजारू बीजों कीनिर्मम छटाई करूँगाखाद और उर्वरक औरसिंचाई के साधनों में भीपहले से जियादा हीचौकसी बरतनी हैमकबूल फ़िदा हुसैन कीचौंकाऊ या बाजारू टेकनीकहमारी खेती को चौपटकर देगी !जी, आपअपने रूमाल मेंगाँठ बाँध लो ! बिलकुल !!सामने, मकान मालिक कीबीवी और उसकी छोरियाँइशारे से इजा़ज़त माँग रही हैंहमारे इस छत पर आना चाहती हैंना, बाबा ना !
अभी हम हल चला रहे हैंआज ढाई बजे तक हमेंबुआई करनी है....
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