ग़ज़ल

ध्यानमग्न वक-शिरोमणि

नागार्जुन · सब कलाम देखें
ध्यामग्नवक-शिरोमणिपतली टाँगों के सहारेजमे हैं झील के किनारेजाने कौन हैं ‘इष्टदेव’ आपके !
‘इष्टदेव’ है आपकेचपल-चटुल लघु-लघु मछलियाँ...चाँदी-सी चमकती मछलियाँ...फिसलनशील, सुपाच्य...सवेरे-सवेरे आपले चुके हैं दो बार !अपना अल्पाऽऽहार !आ रहे हैं जाने कब सेचिन्तन मध्य मत्स्य-शिशुभगवान् नीराकार !
मनाता हूँ मन ही मन,सुलभ हो आपको अपना शिकारतभी तो जमेगाआपका मध्यन्दिन आहार
अभी तो महोदय, आपडटे रहो इसी प्रकारझील के किनारेअपने ‘इष्ट’ के ध्यान में !अनोखा हैआपका ध्यान-योग !महोदय, महामहिम !!
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