ग़ज़ल

फसल

नागार्जुन · सब कलाम देखें
एक की नहीं,दो की नहीं,ढेर सारी नदियों के पानी का जादू:एक के नहीं,दो के नहीं,लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा:एक की नहीं,दो की नहीं,हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण धर्म:
फसल क्‍या है?और तो कुछ नहीं है वहनदियों के पानी का जादू है वहहाथों के स्पर्श की महिमा हैभूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण धर्म हैरूपांतर है सूरज की किरणों कासिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
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