ग़ज़ल

इन घुच्ची आँखों में

नागार्जुन · सब कलाम देखें
क्या नहीं हैइन घुच्ची आँखों मेंइन शातिर निगाहों मेंमुझे तो बहुत कुछप्रतिफलित लग रहा है!नफरत की धधकती भट्टियाँ...प्यार का अनूठा रसायन...अपूर्व विक्षोभ...जिज्ञासा की बाल-सुलभ ताजगी...ठगे जाने की प्रायोगिक सिधाई...प्रवंचितों के प्रति अथाह ममता...क्या नहीं झलक रहीइन घुच्ची आँखों से?हाय, हमें कोई बतलाए तो!क्या नहीं हैइन घुच्ची आँखों में!
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