ग़ज़ल
विचार आते हैं
विचार आते हैंलिखते समय नहींबोझ ढोते वक़्त पीठ परसिर पर उठाते समय भारपरिश्रम करते समयचांद उगता है वपानी में झलमलाने लगता हैहृदय के पानी में
विचार आते हैंलिखते समय नहीं...पत्थर ढोते वक़्तपीठ पर उठाते वक़्त बोझसाँप मारते समय पिछवाड़ेबच्चों की नेकर फचीटते वक़्त
पत्थर पहाड़ बन जाते हैंनक्शे बनते हैं भौगोलिकपीठ कच्छप बन जाती हैसमय पृथ्वी बन जाता है...
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