ग़ज़ल
बेचैन चील
बेचैन चील!!उस जैसा मैं पर्यटनशीलप्यासा-प्यासा,देखता रहूँगा एक दमकती हुई झीलया पानी का कोरा झाँसाजिसकी सफ़ेद चिलचिलाहटों में है अजीबइनकार एक सूना!!
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