ग़ज़ल

दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांग उटांग

गजानन माधव मुक्तिबोध · सब कलाम देखें
स्वप्न के भीतर स्वप्न,विचारधारा के भीतर औरएक अन्यसघन विचारधारा प्रच्छन!!कथ्य के भीतर एक अनुरोधीविरुद्ध विपरीत,नेपथ्य संगीत!!मस्तिष्क के भीतर एक मस्तिष्कउसके भी अन्दर एक और कक्षकक्ष के भीतरएक गुप्त प्रकोष्ठ और
कोठे के साँवले गुहान्धकार मेंमजबूत...सन्दूक़दृढ़, भारी-भरकमऔर उस सन्दूक़ भीतर कोई बन्द हैयक्षया कि ओरांगउटांग हायअरे! डर यह है...न ओरांग...उटांग कहीं छूट जाय,कहीं प्रत्यक्ष न यक्ष हो।क़रीने से सजे हुए संस्कृत...प्रभामयअध्ययन-गृह मेंबहस उठ खड़ी जब होती है--विवाद में हिस्सा लेता हुआ मैंसुनता हूँ ध्यान सेअपने ही शब्दों का नाद, प्रवाह औरपाता हूँ अक्समात्स्वयं के स्वर मेंओरांगउटांग की बौखलाती हुंकृति ध्वनियाँएकाएक भयभीतपाता हूँ पसीने से सिंचितअपना यह नग्न मन!हाय-हाय औऱ न जान लेकि नग्न और विद्रूपअसत्य शक्ति का प्रतिरूपप्राकृत औरांग...उटांग यहमुझमें छिपा हुआ है।
स्वयं की ग्रीवा परफेरता हूँ हाथ किकरता हूँ महसूसएकाएक गरदन पर उगी हुईसघन अयाल औरशब्दों पर उगे हुए बाल तथावाक्यों में ओरांग...उटांग केबढ़े हुए नाख़ून!!
दीखती है सहसाअपनी ही गुच्छेदार मूँछजो कि बनती है कविता
अपने ही बड़े-बड़े दाँतजो कि बनते है तर्क औरदीखता है प्रत्यक्षबौना यह भाल औरझुका हुआ माथा
जाता हूँ चौंक मैं निज सेअपनी ही बालदार सज सेकपाल की धज से।
और, मैं विद्रूप वेदना से ग्रस्त होकरता हूँ धड़ से बन्दवह सन्दूक़करता हूँ महसूसहाथ में पिस्तौल बन्दूक़!!अगर कहीं पेटी वह खुल जाए,ओरांगउटांग यदि उसमें से उठ पड़े,धाँय धाँय गोली दागी जाएगी।रक्ताल...फैला हुआ सब ओरओरांगउटांग का लाल-लालख़ून, तत्काल...ताला लगा देता हूँ में पेटी काबन्द है सन्दूक़!!अब इस प्रकोष्ठ के बाहस आअनेक कमरों को पार करता हुआसंस्कृत प्रभामय अध्ययन-गृह मेंअदृश्य रूप से प्रवेश करचली हुई बहस में भाग ले रहा हूँ!!सोचता हूँ--विवाद में ग्रस्त कईं लोगकई तल
सत्य के बहानेस्वयं को चाहते है प्रस्थापित करना।अहं को, तथ्य के बहाने।मेरी जीभ एकाएक ताल से चिपकतीअक्ल क्षारयुक्त-सी होती हैऔर मेरी आँखें उन बहस करनेवालों केकपड़ों में छिपी हुईसघन रहस्यमय लम्बी पूँछ देखती!!और मैं सोचता हूँ...कैसे सत्य हैं--ढाँक रखना चाहते हैं बड़े-बड़ेनाख़ून!!
किसके लिए हैं वे बाघनख!!कौन अभागा वह!!
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.