ग़ज़ल

ये हासिल है तो क्या हासिल बयाँ से

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
ये हासिल है तो क्या हासिल बयाँ सेकहूँ कुछ और कुछ निकले ज़ुबाँ से
बुरा है इश्क़ का अंजाम यारबबचना फ़ितना-ए-आखिर ज़माँ से
मेरा बचना बुरा है आप ने क्योंअयादत की लब-ए-मोजज़ बयाँ से
वो आए हैं पशेमाँ लाश पर अबतुझे ए ज़िन्दगी लाऊँ कहाँ से
न बोलूँगा न बोलूँगा कि मैं हूँज़्यादा बद गुमाँ उस बदगुमाँ से
न बिजली जलवा फ़रमा है न सय्यादनिकल कर क्या करें हम आशयाँ से
बुरा अंजाम है आग़ाज़-ए-बद काजफ़ा की हो गई खू इमतिहाँ से
खुदा की बेनियाज़ी हाय 'मोमिनहम ईमाँ लाए थे नाज़-ए-बुताँ से
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