ग़ज़ल

मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहते

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहतेथके तुम न "बस, बस, सुना!" कहते कहते
मुझे चुप लगी मुद्द'आ कहते कहते,रुके हैं वो क्या जाने क्या कहते कहते
ज़बाँ गुंग है इश्क़ में गोश कर है,बुरा सुनते-सुनते भला कहते कहते
शब-ए-हिज्र में क्या हजूम-ए-बला है,ज़बाँ थक गई मरहबा कहते कहते
गिला हर्ज़ा-गर्दी का बेजा न था कुछ,वो क्यूँ मुस्कुराये बजा कहते कहते
सद अफ़सोस जाती रही वस्ल की शब ,"ज़रा ठहर ऐ बेवफ़ा" कहते कहते
चले तुम कहाँ मैंने तो दम लिया था,फ़साना दिल-ए-ज़ार का कहते कहते
सितम हाय! गर्दूँ मुफ़स्सिल न पूछो,कि सर फिर गया माजरा कहते कहते
नहीं या सनम 'मोमिन' अब कुफ़्र से कुछ,कि ख़ू हो गई है सदा कहते कहते
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh