ग़ज़ल

आहे-फ़लक-फ़ुगन तेरे ग़म से कहाँ नहीं

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
आहे-फ़लक-फ़ुग़न1 तेरे ग़म से कहाँ नहींजो फ़ितनाख़ेज़2 अब है ज़मीं आसमाँ नहीं
कहना पड़ा मुझे पये-इल्ज़ाम-पंद-गो3वह माजरा जो लायक़े-शरह-ओ-बयाँ नहीं
डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़ेसैयाद की निगाह सू-ए-अशियाँ नहीं
बातें तेरी वह होश-रुबा हैं कि क्या कहूँजो कोई मेरा राज़दाँ है मेरा राज़दाँ नहीं
बे-सरफ़ा-जाँकनी4 का मेरा कुछ तो हो हुसूलमेहनत किसी की आज तलक रायगाँ6 नहीं
करते वफ़ा उम्मीदे-वफ़ा पर तमाम उम्रपर क्या करें कि उसको सरे-इम्तिहाँ7 नहीं
मैं अपनी चश्मे-शौक़8 को इल्ज़ाम ख़ाक दूँतेरी निगाह शर्म से क्या कुछ अयाँ9 नहीं
इतने-सुबुक10 नज़र में है अवज़ाअ-रोज़ग़ार11दुनिया की हसरतें मेरे दिल पर गराँ12 नहीं
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