ग़ज़ल

हरदम रहीने-कशमकशे-दस्ते-यार हैं

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
हरदम रहीने-कशमकशे-दस्ते-यार हैचिलमन के तार, किसके गरेबाँ का तार है
क्या कीजिए कि ताक़ते-नज़्ज़ार1 ही नहींजितने वह बेहिजाब2 हैं, हम शर्मसार3 हैं
उम्रे-दराज़4 की है रक़ीबों5 को आरज़ू6देखो ज़माने-हिज्र के उम्मीदवार हैं
छाती से मैं लगाए रखूँ क्यों न रात-दिनयह दाग़-ओ-ज़ख़्म दिल मेरे यादगार हैं
क्योंकर न रहम हाल पे आये शबे-विसालअंदोह-ओ-दर्द7 रोज़ मुसीबत के यार हैं
कैसे गिनें रक़ीब के ताना-ए-अक़रबा8तेरा ही जी न चाहे तो बातें हज़ार हैं
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