ग़ज़ल

न देना बोसा-ए-पा गो फ़लक झुकता ज़मीं पर है

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
न देना बोसा-ए-पा1 गो2 फ़लक झुकता ज़मीं पर हैकि यह उतना ज़मीं के नीचे है जितना ज़मीं पर है
तड़पता है पड़ा शौक़े-शहादत3 ख़ाक और ख़ूँ मेंगिरा कूचे में तेरे यह लहू किसका ज़मीं पर है
ख़िरामे-नाज़4 ने किसके जहाँ को कर दिया बरहमज़मीं गिरती फ़लक पर है, फ़लक गिरता ज़मीं पर है
रहा उस कू6 में मिट्टी यार ले जाएँ तो ले जाएँकि पड़ता पाँव मानिन्दे-निशाने-पा7 ज़मीं पर है
फ़रिश्तो! ले चले! उस कू से क्यों जन्नत में तुम मुझकोभला क्या साकिनाने-चर्ख़8 का दावा ज़मीं पर है
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