ग़ज़ल
मुझपे तूफ़ाँ उठाये लोगों ने
मुझपे तूफ़ाँ उठाये लोगों नेमुफ़्त बैठे बिठाये लोगों ने
कर दिए अपने आने-जाने केतज़किरे जाये-जाये लोगों ने
वस्ल की बात कब बन आयी थीदिल से दफ़्तर बनाये लोगों ने
बात अपनी वहाँ न जमने दीअपने नक़्शे जमाये लोगों ने
सुनके उड़ती-सी अपनी चाहत कीदोनों के होश उड़ाये लोगों ने
बिन कहे राज़हा-ए-पिन्हानीउसे क्योंकर सुनाये लोगों ने
क्या तमाशा है जो न देखे थेवो तमाशे दिखाये लोगों ने
कर दिया 'मोमिन' उस सनम को ख़फ़ाक्या किया हाये- हाये लोगों ने
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