ग़ज़ल
उलझे न ज़ुल्फ़ से जो परेशानियों में हम
उलझे न ज़ुल्फ़ से जो परेशानियों में हमकरते हैं इसपे नाज़ अदा-दानियों1 में हम
सरगर्म-रक़्स-ताज़ा2 हैं क़ुरबानियों में हमशोख़ी से किसकी आए हैं जोलानियों3 में हम
साबित है जुर्मे-शिकवा न ज़ाहिर गुनाहे-रश्क़5हैराँ हैं आप अपनी परेशानियों में हम
मारे ख़ुशी के मर गये सुबहे-शबे-फ़िराक़6कितने सुबुक हुए हैं गराँ-जानियों7 में हम
आता है ख़्वाब में भी तेरी ज़ुल्फ़ का ख़्यालबेतौर घिर गए हैं परेशानियों में हम
देखा इधर को तूने कि बस दम निकल गयाउतरे नज़र से अपनी निगहबानियों8 में हम
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh