ग़ज़ल
मुझे चुप लगी मुद्दआ कहते-कहते
मुझे चुप लगी मुद्दआ1 कहते-कहतेरुके हैं वह क्या जाने क्या कहते-कहते
ज़बाँ गुँग2 है इश्क़ में गोश3 में कर4 हैबुरा सुनते-सुनते भला कहते-कहते
शबे-हिज्र में क्या हुजूमे-बला5 हैज़बाँ थक गयी मरहबा6 कहते-कहते
गिला-हरज़हगर्दी7 का बेजा न थ कुछवह क्यों मुस्कुराये बजा कहते-कहते
सद्-अफ़सोस8 जाती रही वस्ल की शबज़रा ठहर ऐ बेवफ़ा कहते-कहते
चले तुम कहाँ मैंने तो दम लिया हैफ़साना-दिले-ज़ार9 का कहते-कहते
बुरा हो तेरा मरहमे-राज़10 तूनेकिया उनको रुसवा11 बुरा कहते-कहते
सितमहाये-गरदूँ12 मुफ़स्सल13 न पूछोकि सर फिर गया माजरा14 कहते-कहते
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