ग़ज़ल

ख़ुदा की याद दिलाते थे नज़अ में अहबाब

मोमिन ख़ाँ मोमिन · सब कलाम देखें
ख़ुदा की याद दिलाते थे नज़अ1 में अहबाब2हज़ार शुक्र कि उस दम वह बदगु़माँ3 न हुआ
मय न उतरी गले से जो उस बिनमुझको यारों ने पारसा जाना
आहे-सहर5 हमारी फ़लक6 से फिरी न होकैसी हवा चली ये कि जी सनसना गया
किया तुमने क़त्ले-जहाँ इक नज़र मेंकिसी ने न देखा तमाशा किसी का
दिल में नासेह7 आये, क्या अपना ख़्यालजा सके कब यार के मस्कन8 में हम
किए हैं तूल अमल ने तमाम काम ख़राबहमेशा नज़्मे-जहाँ के हैं कार-बार मुझे
वह लाला-रुह-फ़ज़ा दे कहाँ तलक बोसेकि जो है, काम है, यहाँ शौक़े-जाँ-फ़िशाँ9 के लिए
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