ग़ज़ल
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ारया इलाही ये माजरा क्या है
मैं भी मुँह में ज़बाँ रखता हूँकाश पूछो कि मुद्दआ क्या है
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