ग़ज़ल तुम न आए तो क्या सहर न हुई मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन तुम न आए तो क्या सहर न हुईहाँ मगर चैन से बसर न हुईमेरा नाला सुना ज़माने नेएक तुम हो जिसे ख़बर न हुई पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh