ग़ज़ल

तुम न आए तो क्या सहर न हुई

मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें
तुम न आए तो क्या सहर न हुईहाँ मगर चैन से बसर न हुईमेरा नाला सुना ज़माने नेएक तुम हो जिसे ख़बर न हुई
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