ग़ज़ल घर में था क्या कि तिरा ग़म उसे ग़ारत करता मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन घर में था क्या कि तिरा ग़म उसे ग़ारत करतावो जो रखते थे हम इक हसरत-ए-तामीर सो है पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh