ग़ज़ल

नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच

मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें
नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींचअगर शराब नहीं इन्तज़ार-ए-साग़र खींच
कमाल-ए-गरमी-ए सई-ए-तलाश-ए-दीद न पूछब रंग-ए-ख़ार मिरे आइने से जौहर खींच
तुझे बहाना-ए-राहत है इन्तज़ार ऐ दिलकिया है किस ने इशारा कि नाज़-ए-बिस्तर खींच
तिरी तरफ़ है ब हसरत नज़ारा-ए-नरगिसब कोरी-ए-दिल-ओ-चश्म-ए रक़ीब साग़र खींच
ब नीम-ग़मज़ा अदा कर हक़-ए वदीअत-ए-नाज़नियाम-ए --परदा-ए ज़ख्म-ए-जिगर से खंज़र खींच
मिरे क़ददा में है सहबा-ए-आतिश-ए-पिनहांब रू-ए सुफ़रा कबाब-ए-दिल-ए-समन्दर खींच
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh