ग़ज़ल
दिल लगा कर लग गया उन को भी तनहा बैठना
दिल लगा कर लग गया उन को भी तन्हा बैठनाबारे अपनी बेकसी की हम ने पाई दाद याँ
हैं ज़वाल-आमादा अजज़ा आफ़रीनश के तमाममेहर-ए-गर्दूं है चराग़-ए-रहगुज़ार-ए-बाद याँ
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