ग़ज़ल

फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया

मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें
फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आयादिल जिगर तश्ना-ए-फ़रियाद आया
दम लिया था न क़यामत ने हनोज़फिर तेरा वक़्त-ए-सफ़र याद आया
सादगी हाये तमन्ना यानीफिर वो नैइरंग-ए-नज़र याद आया
उज़्र-ए-वामाँदगी अए हस्रत-ए-दिलनाला करता था जिगर याद आया
ज़िन्दगी यूँ भी गुज़र ही जातीक्यों तेरा राहगुज़र याद आया
क्या ही रिज़वान से लड़ाई होगीघर तेरा ख़ुल्‌द में गर याद आया
आह वो जुर्रत-ए-फ़रियाद कहाँदिल से तंग आके जिगर याद आया
फिर तेरे कूचे को जाता है ख़्यालदिल-ए-ग़ुमगश्ता मगर याद आया
कोई वीरानी-सी-वीरानी हैदश्त को देख के घर याद आया
मैंने मजनूँ पे लड़कपन में 'असद'संग उठाया था के सर याद आया
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