ग़ज़ल जादा-ए-रह ख़ुर को वक़्त-ए-शाम है तार-ए-शुआ मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन जादा-ए-रह ख़ुर को वक़्त-ए-शाम है तार-ए-शुआचर्ख़ वा करता है माह-ए-नौ से आग़ोश-ए-विदा पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh