ग़ज़ल

अज़ मेहर ता-ब-ज़र्रा दिल-ओ-दिल है आइना

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अज़ मेहर ता-ब-ज़र्रा दिल-ओ-दिल है आइनातूती को शश जिहत से मुक़ाबिल है आइना
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