ग़ज़ल

गर तुझ को है यक़ीन-ए-इजाबत दुआ न माँग

मिर्ज़ा ग़ालिब · सब कलाम देखें
गर तुझ को है यक़ीन-ए-इजाबत दुआ न माँगयानी बग़ैर-ए-यक-दिल-ए-बे-मुद्दआ न माँग
आता है दाग़-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार यादमुझ से मिरे गुनह का हिसाब ऐ ख़ुदा न माँग
--अय आरज़ू शहीद-ए वफ़ा ख़ूं-बहा न माँगजुज़ बहर-ए दसत-ओ-बाज़ू-ए क़ातिल दुआ न माँग
बर-हम है बज़म-ए ग़ुनचह ब यक जुनबिश-ए नशातकाशानह बसकि तनग है ग़ाफ़िल हवा न माँग
मैं दूर गरद-ए-अरज़-ए-रुसूम-ए-नियाज़ हूँदुशमन समझ वले निगह-ए आशना न माँग
यक-बख़त औज नज़र-ए-सुबुक-बारी-ए असदसर पर वबाल-ए सायह-ए बाल-ए-हुमा न माँग
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