ग़ज़ल
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़जान का रोग है बला है इश्क़
इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखोसारे आलम में भर रहा है इश्क़
इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ हैयानी अपना ही मुब्तला है इश्क़
कौन मक़्सद को इश्क़ बिन पहुँचाआरज़ू इश्क़ मुद्दआ है इश्क़
मीर जी ज़र्द रंग होते होक्या कहीं तुम को भी हुआ है इश्क़
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