ग़ज़ल

क़द्र रखती न थी मता-ए-दिल

मीर तक़ी मीर · सब कलाम देखें
क़द्र रखती न थी मता-ए-दिलसारे आलम1 को मैं दिखा लाया
दिल के इक क़तरा2 खूँ नहीं है बेशएक आलम के सर बला लाया
सब पे जिस बार ने गिरानी3 कीउस को ये नातवाँ4 उठा लाया
दिल मुझे उस गली में ले जाकरऔर भी खाक में मिला लाया
इब्तिदा5 ही में मर गए सब यारइश्क़ की कौन इंतिहा6 लाया
अब तो जाते हैं बुतकदे7 से मीरफिर मिलेंगे अगर खुदा लाया
1-दुनिया2-बूंद3-अभाव4-दुर्बल5-शुरुआत,पहल6-अंत7-मंदिर,प्रेयसी का घर
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